होली आई खुशियाँ लाई! हर्बल रंगों से बसंती राणा ने बदली महिलाओं की तक़दीर

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वैष्णवी स्वयं सहायता समूह की संचालिका श्रीमती बसंती राणा ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि महिलाओं को मेहनत, सही अवसर और सरकार का सहयोग मिले, तो वे आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल बन सकती हैं।
आगामी होली पर्व को देखते हुए, वर्तमान में समूह द्वारा फूलों, पालक, गाजर और चुकंदर से निर्मित प्राकृतिक हर्बल रंगों का बड़े स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है। ये रंग पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल, त्वचा के लिए सुरक्षित और रासायनिक मुक्त हैं। इसी कारण इन हर्बल रंगों की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी तेजी से बढ़ रही है।
श्रीमती बसंती राणा के नेतृत्व में वैष्णवी स्वयं सहायता समूह आज महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का सशक्त उदाहरण बन चुका है। समूह द्वारा वर्षभर सीजनल उत्पादों को प्राथमिकता दी जाती है—
रक्षा बंधन पर राखी निर्माण
करवाचौथ पर ऐपन डिज़ाइन थालियां
दिवाली पर फूल मालाएं
होली पर प्राकृतिक हर्बल रंग
इसके अतिरिक्त समूह द्वारा धूप-अगरबत्ती, मसाले, आचार सहित कई स्वदेशी व हस्तनिर्मित उत्पादों का भी निर्माण किया जाता है।
आर्थिक सफलता
आर्थिक दृष्टि से भी यह समूह अत्यंत सफल रहा है।
वर्ष में एक बार खेल महाकुंभ के दौरान कैंटीन संचालन से सभी खर्चों के बाद लगभग ₹8 लाख की आय
वर्षभर उत्पादों की बिक्री से लगभग ₹4 लाख की अतिरिक्त वार्षिक आय
महिला आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्तमान सरकार द्वारा समूह को ₹15 लाख का ऋण उपलब्ध कराया गया, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ी और कार्यों का विस्तार संभव हुआ।
श्रीमती बसंती राणा और वैष्णवी स्वयं सहायता समूह की यह सफलता कहानी महिला आत्मनिर्भरता नीति की जीवंत मिसाल है। यह न केवल अन्य महिलाओं को प्रेरित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आत्मनिर्भर भारत की नींव गांवों और स्वयं सहायता समूहों से ही मजबूत होती है।

TVN News Uttarakhand
Author: TVN News Uttarakhand

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