
उत्तर प्रदेश पुलिस उप निरीक्षक (UPSI) भर्ती परीक्षा–2026 में हिंदी अनुभाग के एक प्रश्न के विकल्प में ‘पंडित’ शब्द को अवसर के अनुसार बदल जाने वाला (अवसरवादी) के अर्थ में शामिल किए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। इस प्रश्न के सामने आने के बाद ब्राह्मण समाज सहित सवर्ण समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
सवर्ण शक्ति संगठन ने इस प्रश्न को समाज विशेष की भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि ‘पंडित’ शब्द भारतीय संस्कृति, ज्ञान और सम्मान का प्रतीक है, ऐसे शब्द को नकारात्मक अर्थ में प्रयोग करना अत्यंत आपत्तिजनक है।
संगठन ने आरोप लगाया कि यह प्रश्न उत्तर प्रदेश पुलिस की एक प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षा में शामिल किया गया, जो न केवल लापरवाही को दर्शाता है बल्कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का भी प्रयास है। सवर्ण शक्ति संगठन ने सवाल उठाया कि यदि किसी अन्य वर्ग से जुड़े सम्मानजनक शब्द का इस प्रकार प्रयोग किया जाता, तो क्या तत्काल कार्रवाई नहीं होती।
संगठन ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से मांग की है कि संबंधित प्रश्न को तुरंत निरस्त किया जाए, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
सवर्ण शक्ति संगठन, उत्तराखंड ने यह भी आरोप लगाया कि लगातार सवर्ण समाज के प्रति भय और अपमान का माहौल बनाया जा रहा है, जिसकी वह घोर निंदा करता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र न्यायोचित कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस संबंध में संगठन के सह संयोजक भुवन भट्ट ने कहा कि समाज के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने तक संघर्ष जारी रहेगा।
Author: TVN News Uttarakhand
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